The 2-Minute Rule for WAKE UP WITH DETERMINATION & FOCUS


open and we develop into trinetri (kinds with a 3rd eye)...we study Raja  Yoga to achieve a kingdom...by getting as

Your generation of science is merging growth into its essence. It truly is producing extremely refined and powerful instruments for destruction. In a similar way, You should turn out to be learn creators and make use of your delicate powers for the task of institution.

Do all of you lecturers continuously working experience the phase of ascent even though transferring alongside? The speciality of the Trainer will be to be an embodiment of knowledge. A Trainer isn’t just another person just one who relates expertise, since, collectively with relating expertise, a Instructor is somebody who has to present an experience. Hence the speciality of the Instructor is to talk understanding and also give an encounter by means of her type. Considering that the copper age, Many individuals of great renown have similar know-how, provided lectures or classes. Who will become effectively renowned on this path of data?  Could it be individuals that merely give lectures?

संस्कार पर विजयी रूहानी सेनानी हूँ .......... मैं आत्मा

ज्ञान के सागर पतित पावन निराकार परमपिता परमात्मा शिव बाबा हैं...मेरा बाबा... मीठा बाबा...प्यारा बाबा.

दान करनेवाले महादानी हैं...ब्लेसिंग देकर ब्लिसफुल बननेवाले, वरदानी हैं...

संकल्प शक्तिलाई गलत प्रयोग नगर, यथार्थ प्रयोग गर

மன்மனாபவ. போதும். இதிலேயே ஜின்னாகி விடுங்கள். ஜின்னுடைய உதாரணம் கொடுக்கிறார்கள் அல்லவா? வேலை கொடு என்கிறது...... ஆகையால் பாபாவும் வேலை கொடுக்கின்றார். இல்லையெனில் மாயை (ஜின்-பூதம்) சாப்பிட்டுவிடும். பாபாவின் முழுமையான உதவியாளர் ஆகவேண்டும். தனியாக பாபா செய்ய மாட்டார். தந்தை இராஜ்யமும் செய்யவில்லை. நீங்கள் சேவை செய்கின்றீர்கள். இராஜ்யமும் உங்களுக்குத்தான். நானும் மகத தேசத்தில் வருகின்றேன் என்று உங்களுக்கு கூறுகின்றார். மாயாவும் கூட முதலை போன்றது. எத்தனை மகாரதிகளை விழுங்கி விடுகிறது. இது அனைத்துமே எதிரி. தவளையின் எதிரியாக பாம்பு இருக்கின்றதல்லவா. இவ்வாறு உங்களுடைய எதிரி மாயா என்பது உங்களுக்குத் தெரியும். நல்லது.

इसको भगवान् श्रीकृष्ण ने मिथ्याचार कहा है। यह पाखण्ड से घातक है। पाखण्ड दूसरे के प्रति असत्य आचरण है। मिथ्याचार तो स्वयं को ही धोखा देने का प्रयास है। यह तो व्यक्तित्व को ही विभाजित कर देगा। सामान्यतः इन्द्रियों को नियन्त्रित करना कठीन बताया जाता है। पर यहाँ willpower ऐसी स्थिति का वर्णन है जहाँ उपर से कर्मेन्द्रियों को तो रोक लिया है कर्म करने से किन्तु मन के स्तर पर कर्म जारी है। इस मिथ्याचार से बचने के लिये एक उपाय तो हमने देखा है। स्वयं को पूर्ण व्यस्त रखना। अपनी मर्जी से काम करना।

छत्रछाया में हूँ .....अष्ट इष्ट महान सर्व श्रेष्ठ हूँ ...... मैं आत्मा मास्टर

मन-बुद्धि को मनमत से  फ्री  कर  सूक्ष्मवतन  का  अनुभव  करने  वाले  डबल  लाइट  भव!

With the delicate power of elevated feelings, pure Angle and also a eyesight of love and co-Procedure, we, the souls are the best and also the holiest…



यसरी हर सेकेण्ड पुण्यको पूँजी जम्मा गर। हर सेकेण्ड, हर संकल्पको मूल्यलाई जानेर, संकल्प र सेकेण्डलाई प्रयोग गर। जुन कार्य आजका अनेक पद्मपतिले गर्न सक्दैनन् त्यो तिम्रो एक संकल्पले आत्मालाई पद्मापद्मपति बनाउन सक्छ। त्यसैले तिम्रो संकल्पको शक्ति कति श्रेष्ठ छ। चाहे जम्मा गर र गराऊ, चाहे व्यर्थ गुमाऊ, यो तिमीमाथि निर्भर छ। गुमाउनेलाई पश्चाताप गर्नु पर्नेछ। जम्मा गर्नेहरु सर्व प्राप्तिको झुलामा झुल्छन्। कहिले सुखको झुलामा, कहिले शान्तिको झुलामा, कहिले आनन्दको झुलामा। र गुमाउनेहरु झुलामा झुल्नेलाई देखेर आफ्नो झोलीलाई हेरिरहन्छन्। तिमी सबै त झुल्ने हौ नि?

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